Vicharslide

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Information about Vicharslide

Published on August 31, 2008

Author: vedanti

Source: slideshare.net

Description

The Thought Process described in terms of vedanta in hindu scriptures

विचार

जानवर पेट के लिए श्रम करता है।

मनुष्य पेट के लिए श्रम करता है।

जानवर प्रजनन करता है।

मनुष्य प्रजनन करता है।

जानवर इन्द्रियों का भोग करता है।

मनुष्य इन्द्रियों का भोग करता है।

क्या है जानवर और मनुष्य में अन्तर ?

मनुष्य विचार कर सकता है जानवर विचार नहीं कर सकता। और

विचार एक शक्ति है

और यदि इसको सुव्यवस्थित कर लिया जाये , तो यह शक्ति अज्ञेय हो जाती है।

जब आप क्लब के बारे में सोचते हैं और घर से बाहर निकलते हैं , आप क्लब की ओर जाते हैं , न कि मार्केट , थियेटर अथवा आफिस की ओर।

हमारी शक्तिशाली भावनायें ही हमारे कर्मो में अभिव्यक्त होती हैं। हमारी बाह्य क्रियायें हमारे गहन विचारों और भावनाओं की स्पष्ट सूचक होती हैं।

गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं। हे कुन्तीपुत्र , वह सदा उसी भाव में रंगा रहने के कारण उसे ही प्राप्त होता है मनुष्य मृत्यु के समय जिस - जिस भाव का स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है

साधक जीवन भर जिन विचारों का चिन्तन करता रहा था , वही स्थूल शरीर की मृत्यु के पश्चात सूक्ष्म शरीर की उडान की अन्तिम दिशा का निश्चय करते हैं।

अपने जीवन में विचारों की शुद्धि करें।

विचार शुद्ध तो वाणी और आचार शुद्ध

यही साधन है आनन्द और मुक्ति का

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