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रमज़ान के रोज़े और उसके क़ियाम (तरावीह) की फज़ीलत

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Information about रमज़ान के रोज़े और उसके क़ियाम (तरावीह) की फज़ीलत
Spiritual

Published on September 17, 2014

Author: nisreenelhassi

Source: slideshare.net

Description

प्रस्तुत पुस्तिका में रमज़ान के रोज़े और उसके क़ियाम (तरावीह) की फज़ीलत, तथा उसके अंदर नेक कामों द्वारा एक दूसरे से आगे बढ़ने की फज़ीलत से संबंधित कुछ नसीहतें हैं, साथ ही कुछ ऐसे महत्वपूर्ण अहकाम का वर्णन है जो कुछ लोगों पर गुप्त रह जाते हैं।
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रमज़ान के रोज़े और उसके Ǒक़याम (तरावीह) कȧ फज़ीलत [ Ǒहन्द & Hindi & [ هندي अब्दु अज़ीज़ ǒबन अब्दुल्ल ǒबन बाज़ अनुवादः अताउरर्हमान िज़याउल्ल 2013 - 1434

فضل صيام رمضان وقيامه ا ل « ا لغة هلندية » ز ن عبد لله ن از ﺑ ﺑ ﺑ ا ا ɋ عبد لعز تمجة: الاء محن ضياء لله ﻄ ا ﺮ 2013 - 1434

3  ǒबिस्मल्ला�हरर्हमा�नरर मɇ अ�त मेहरबान और दयालु अल्ला के नाम से आरम् करता हूँ। ﻮ ﺮ ﺑ ﺤ � � ﺘ ه � ، نا لمﷲ مﺪوه سﻴﻪﻨﻌﺘو س غﻔﺮ،ﻧﻌو ذ اﻦﻣﷲ شور أنفسنا عد: ﻟ ﺌ ﻼ ﺪ د أ ﻪ Ɋ ات عﻨﻤﺎا،ﻳﻬﻦﻣ هﻼﻳﻪﻦﻣﻠﻟﻞﻞﻓﻓﻀﻀﷲوما، ﻫﺎي ل، و हर प्रक कȧ हम् व सना (प्रशं और गुणगान) केवल अल्ला के �लए योग् है, हम उसी कȧ प्रशं करते हɇ, उसी से मदद मांगते और उसी से ¢मा याचना करते हɇ, तथा हम अपने नफ् कȧ बुराई और अपने बुरे कामɉ से अल्ला कȧ पनाह मɅ आते हɇ, िजसे अल्ला तआला Ǒहदायत प्रद कर दे उसे कोई पथभ् (गुमराह) करने वाला नह�ं, और िजसे गुमराह कर दे उसे कोई Ǒहदायत देने वाला नह�ं। हम् व सना के बाद :

4 रमज़ान के रोज़े और उसके Ǒक़याम (तरावीह) कȧ फज़ीलत अब्दु अज़ीज़ ǒबन अब्दुल्ल ǒबन बाज़ कȧ ओर से हर मुसलमान के नाम, अल्ला मुझे और उन्ह ईमानवालɉ के रास्त पर चलाए और मुझे और उन्ह क़ु रआन व सुन्न के समझने कȧ तौफȧक़ प्रद करे। आमीन ये रमज़ान के रोज़े और उसके Ǒक़याम (तरावीह) कȧ फज़ीलत, तथा उसके अंदर नेक कामɉ Ʈारा एक दूसरे से आगे बढ़ने कȧ फज़ीलत से संबं�धत कु छ नसीहतɅ हɇ, साथ ह� कु छ ऐसे महत्वपूण अहकाम का वणर् है जो कु छ लोगɉ पर गुƯ रह जाते हɇ। अल्ला के रसूल सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से प्रमाि हɇ Ǒक आप अपने सहाबा (सा�थयɉ) को रमज़ान के मह�ने के आगमन कȧ शुभसूचना देते थे और आप सल्लल्ला अलैǑह व

5 सल्ल उन्ह यह बतलाते थे Ǒक यह ऐसा मह�ना है िजसमɅ दया व करूण के दरवाज़े और स्वग के दरवाज़े खोल Ǒदए जाते हɇ, नरक के दरवाज़े बन् कर Ǒदए जाते हɇ और शैतानɉ को जकड़ Ǒदया जाता है। आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है: ‘‘जब रमज़ान कȧ पहली रात होती है तो स्वग के दरवाज़े खोल Ǒदए जाते हɇ चुनाँचे उनमɅ से कोई दरवाज़ा बन् नह�ं Ǒकया जाता, और नरक (जहन्न) के दरवाज़े बन् कर Ǒदए जाते हɇ चुनाँचे उनमɅ से कोई दरवाज़ा खोला नह�ं जाता, और शैतानɉ को जकड़ Ǒदया जाता है, और एक पुकारने वाला पुकारता है Ǒक ऐ भलाई के चाहने वाले! आगे बढ़, और ऐ बुराई के चाहने वाले! बाज़ आ जा, और अल्ला तआला हर रात अपने कु छ बन्द को जहन्न से आज़ाद करता रहता है।''०F1 1 (सह�ह बुख़ार�, Ǒकताबुस्सौ (१८००), सह�ह मुिस्ल, Ǒकताबुिस्-याम (१०७ ९), सुनन

6 तथा आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल फरमाते हɇ : ''बरकत का मह�ना रमज़ान तुम्हार पास आ चुका है, िजसमɅ अल्ला तुमको ढाँप लेता है तो रमहत उतारता है, गुनाहɉ को �मटाता है और दुआ क़बूल करता है। अल्ला इस मह�ने मɅ तुम्हार (नेकȧ मɅ) एक दूसरे से आगे बढ़ने कȧ चे�ा को देखता है तो तुम्हार ऊपर अपने फǐरशतɉ के सामने गवर करता है। अतः तुम अपनी ओर से अल्ला को नेकȧ व भलाई Ǒदखलाओ, क्यǑ� वह व्यƠ अभागा (बदनसीब) है जो इस मह�ने मɅ अल्ला कȧ रहमत (दया) से वं�चत रह जाए।'' इस हद�स को हैसमी ने मजमउज़्ज़वाइ मɅ (३/१४२) अƣबरानी अलकबीर कȧ ओर मन्सू Ǒकया हɇ। � त�मर्ज़, Ǒकताबुस्सौ (६८२), सुनन नसाई, Ǒकताबुिस्सया (२१०६), सुनन इब्न माजा, Ǒकताबुिस्सया (१६४२), सुनन दारमी, Ǒकताबुस्सौ, (१७७५).

7 तथा आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल फरमाते हɇ : ‘‘िजस व्यƠ ने ईमान के साथ पुण् कȧ आशा रखते हुए रमज़ान का रोज़ा रखा तो उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदए जाएंगे। और िजसने ईमान कȧ हालत मɅ पुण् कȧ आशा रखते हुए रमज़ान का Ǒक़याम Ǒकया (तरावीह कȧ नमाज़ पढ़�) तो उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदए जायɅगे। और िजस ने ईमान रखते हुए पुण् कȧ आशा मɅ क़द वाली रात मɅ Ǒक़याम Ǒकया (इबादत मे ǒबताया) उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदये जाएंगे।१F1 1 सह�ह बुखार�, Ǒकताब सलातुत-तरावीह (१९१०), सह�ह मुिस्ल Ǒकताब सलातुल मुसाǑफर�न व क़सरुह (७६०), सुनन �त�मर्ज़, Ǒकताबुस्सौ (६८३), सुनन नसाई Ǒकताबुिस्सया (२२०३), सुनन अबू दाऊद, Ǒकताबुस्सला (१३७२), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/२४१), सुनन दारमी Ǒकताबुस्सौ (१७७६).

8 तथा आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल फरमाते हɇ Ǒक अल्ला सवर्शƠ�मा फरमाता है : आदम के बेटे का हर कायर उसी के �लए है, नेकȧ को उसके दस गुना से सात सौ गुना तक कर Ǒदया जाता है �सवाय रोज़े के, क्यǑ� वह मेरे �लए है और मɇ ह� उस का बदला दूँगा। उसने अपनी कामवासना और अपना खाना, पानी मेरे �लये त्या Ǒदया। रोज़ेदार के �लए दो खु�शयɉ के अवसर हɇ, एक खुशी उसे रोज़ा खोलते समय होती है और एक खुशी उस वक़् होगी जब वह अपने रब से �मलेगा। रोज़ेदार के मुँह कȧ गंध अल्ला के �नकट कस्तूर कȧ सुगंध से भी अ�धक अच्छ है।''२F1 1 सह�ह बुख़ार�, Ǒकताबुस्सौ (१८०५ ), सह�ह मुस�लम, Ǒकताबुिस्सया (११५ १), सुनन ु ु ु ु � � ् ् ् ् त मज़र, Ǒकताबससौ (७ ६४), सनन नसाई Ǒकताबिसयसा (२२१५ ), सनन इबन माजा, Ǒकताबुिस्याम (१६३८), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ ५ १६).

9 रमज़ान के रोज़े और उसके Ǒक़याम कȧ फज़ीलत, तथा स्वय रोज़े कȧ फज़ीलत मɅ विणर् हद�सɅ बहुत अ�धक हɇ। अतः एक मो�मन को चाǑहए Ǒक वह इस बहुमूल् अवसर से लाभ उठाए और वह अवसर यह है Ǒक अल्ला ने उस पर उपकार करते हुए उसे रमज़ान का मह�ना प्रद Ǒकया, तो उसे चाǑहए Ǒक वह नेǑकयɈ कȧ तरफ जल्द करे और बुराइयɉ से दूर रहे और उन कतर्व् के पालन मɅ संघषर करे िजन्ह अल्ला ने उसके ऊपर अ�नवायर Ǒकया है ǒवशेषकर पाँचɉ नमाज़Ʌ, क्यǑ� यह इस्ला का स्तं है और शहादतैन (ला इलाहा इल्लल्लाव मुहम्मदुरर्सूलुल्) के बाद सबसे बड़ा फर�ज़ा (कतर्व) है। अतः हर मुसलमान मदर व औरत पर इन नमाज़ɉ कȧ पाबंद� करना और इन्ह उनके समय पर इत�मनान और ǒवनम्र के साथ अदा करना अ�नवायर है। तथा मदȾ के हक़ मɅ इसका एक महत्वपूण कतर्व इसे जमाअत के साथ अल्ला के उन घरɉ मɅ अदा करना है,

10 अल्ला ने िजन को बुलन् करने और िजन मɅ अपना नाम जपने का आदेश Ǒदया है जैसा Ǒक अल्ला तआला ने फरमाया: ع ت ة و م ل رََُُّ � ǻ ةَوآ وَُاالز اَكْوعاَ اََ ر اَّكِعَِŕ مواالصَ ي ﺒ �ﻮرةا لق ة : ٤٣ ) ﺮ ) َِ ''और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और रुकू करने वालɉ के साथ रुकू करो।'' (सूरतुल बक़रा : ४३). और अल्ला तआला ने फरमाया: و ا ة م ل ف و ﺒ تَََُُْ � ي ط س ﺮ � :ﻮرةا لق ة ) َ ǻا لَصا وََّا لَّصا ا ل قَووُا ق نَتِِ�ا ظِو  (٢٣٨ ''नमाज़ɉ कȧ Ǒहफाज़त करो ǒवशेष रु से बीच वाली नमाज़ कȧ और अल्ला तआला के �लए अदब से खड़े रहो।'' (सूरतुल बक़रा : २३८). और अल्ला तआला ने फरमाया: ن ل د ح ؤُْْ � ن ﻮ ن ت ا ﻤ � (١ -ﻮرةا لؤمن ن: ٢ )  صَ هَِ مِ خَ شِعوَǍفَْأ مَََْلا مُْْوُِاَ يَِّنَ هم ِ

11 ''�नःसंदेह ईमान वालɉ ने सफलता प्र करली जो अपनी नमाज़ मɅ खुशूअ (ǒवनम्र) अपनाते हɇ।'' (सूरतुल मूमेनून : १-२). यहाँ तक Ǒक अल्ला ने फरमाया: كُُْْْْ � ر ن ي � نِ ȯولوََِهملرثاا وَُُِْاَ يَِّنَ ي ثَِوَ الفِردَوسَ هم  ﺳرة ﻮ ن ا اُ )  وȐ ه خَِ ١٠ ) ﻮ ﻤ - لؤمن ن : ١١ (जो अपनी नमाज़ɉ कȧ देख भाल करते हɇ।) ''यह� लोग वाǐरस हɇ जो Ǒफरदौस (स्वग) के वाǐरस हɉगे जहाँ वे हमेशा रहɅगे।'' (सूरतुल मूमेनून : १०-११). और अल्ला के नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल ने फरमाया : ''हमारे और उनके बीच नमाज़ का अहद व पैमान है तो िजसने इसे छोड़ Ǒदया उसने कु फ Ǒकया।''३F1 1 ु ु ु ु ु � � ् ् सनन त मज़र, Ǒकताबल ईमान (२६२१), सनन नसाई, Ǒकताबसलसा (४६३), सनन इब्न माजा, Ǒकताब इक़ामतुस्सला (१०७ ९), मुसनद अहमद ǒबल हंबल (५ / ३४६)

12 नमाज़ के पƱात सब से महत्वपूण कतर्व ज़कात का अदा करना है जैसा Ǒक अल्ला तआला ने फरमाया: قَُُِّّ � و � � ء � � ا يُننفحا وَُِيمالّصا�ََِِِْ لص�ََُّ عَبدْوااُ� وُاإ ر تؤاُُْ م ة و و�َ اَأ م و ق ي ة ﺒ لَُّ �ﻮرةا ل نة : ٥) ك )  لّز ذََ دِين اليَْةَِِ ''उन्ह इस के �सवा कोई आदेश नह�ं Ǒदया गया Ǒक केवल अल्ला कȧ उपासना करɅ उसी के �लए धमर को खा�लस रखɅ इब्राह हनीफ के धमर पर और नमाज़ को कायम रखɅ और ज़कात देते रहɅ, यह� है धमर सीधी �मल्ल का।'' (सूरतुल बै�यनाः ५) और अल्ला तआला ने फरमाया: وَ ن ل لُُْْ Ƨ م رتَُȲ يوعااُولسرلََّع َََّ  طَِﻮﻨﻟرةا ر : ة أ ﻮ و ) َ لزوََّ�َيوملصةاا وََََُِّتاآاُ� (٥٦

13 ''नमाज़ कȧ पाबंद� करो ज़कात अदा करो और अल्ला तआला के रसूल कȧ आ£ा पालन मɅ लगे रहो ताǑक तुम पर दया कȧ जाय।'' (सूरतुन्नूर 56) अल्ला कȧ महान Ǒकताब और सुन्न इस बात का तकर देते हɇ Ǒक िजसने अपने धन का ज़कात भुगतान नह�ं Ǒकया है वह उसी के Ʈारा Ǒक़यामत के Ǒदन दंǑडत Ǒकया जायेगा। नमाज़ और ज़कात के पƱात् सबसे महत्वपूण बात रमज़ान के रोज़े हɇ और यह इस्ला के उन पाँच स्तंभ मɅ से एक स्तं है जो नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल के इस कथन मɅ उिल्लिख हɇ: ‘‘इस्ला कȧ बु�नयाद पाँच चीज़ɉ पर स्था�प है, ला इलाहा इल्लल्ल और मुहम्मदुरर्सूलुल् कȧ गवाह�

14 द ेना, नमाज़ स्था�प करना, ज़कात देना, रमज़ान के रोज़े रख़ना और खान-ए-काअबा का हज् करना।'' 4F1 मुसलमान के ऊपर अ�नवायर है Ǒक वह अपने रोज़े और Ǒक़याम (तरावीह) को उन बातɉ और कायɟ से सुरि¢त रखे िजन को अल्ला ने उस के ऊपर हराम (�नǒषद) ठहराया है, क्यǑ� रोज़े का मक़सद अल्ला का आ£ा पालन, उसकȧ विजर् चीज़ɉ का सम्मा करना, और अपने स्वाम कȧ पैरवी मɅ अपनी इच्छ का ǒवरोध करने मɅ संघषर करना, और अल्ला कȧ हराम कȧ हुई चीज़ɉ से सब करने (बाज़ रहने) पर अपने आपको आद� बनाना है। उसका मक़सद मात खाना पानी और अन् रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ɉ का त्यागन नह�ं है। इसी�लए सह�ह हद�स मɅ नबी 1 ु ु ु ु ु � � � � � ् सह ह बखार , Ǒकताबलईमान (८), सह ह मिसल Ǒकताबलईमान (१६), सनन त मज़री Ǒकताबुल ईमान (२६०९), सुनन नसाई Ǒकताबुल ईमान (५ ००१) मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ २६).

15 सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से विणर् है Ǒक आप ने फरमाया : ''रोज़ा ढाल है, अतः जब तुम मɅ से Ǒकसी के रोज़ा का Ǒदन हो तो वह अƲील बातɅ न करे, शोर-गुल न करे, अगर उसे कोई बुरा-भला कहे (गाली दे) या उस से लड़ाई झगड़ा करे, तो उस से कह दे Ǒक: मɇ रोज़े से हूँ।'' 5F1 आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से सह�ह हद�स मɅ विणर् है Ǒक आप ने फरमाया : ‘‘जो व्यƠ झूठ� बात कहने और झूठ पर अमल करने और मूखर्त से न बचे तो अल्ला तआला को 1 सह�ह बुखार� Ǒकताबुस्सौ, (१९०४), सह�ह मुिस्ल Ǒकताबुिस्-याम (११५ १), सुनन ु ु ु ु � � द द ् ् ् त मज़र, Ǒकताबससौ (७ ६४), सनन नसाई Ǒकताबिसयसा, (२२१६), सनन अबू ाऊ Ǒकताबुस्सौ (२३६३).

16 इस बात कȧ कोई आवश्यकत नह�ं है Ǒक वह अपना खाना पानी त्या कर दे।''६F1 इन प्रमा और इनके अलावा अन् प्रमा से £ात हुआ Ǒक रोज़ेदार के ऊपर उन सभी चीज़ɉ से बचना अ�नवायर है िजन को अल्ला ने उसके ऊपर हराम क़रार Ǒदया हɇ और उन सभी चीज़ɉ कȧ पाबंद� करना अ�नवायर है िजन को अल्ला ने उस के ऊपर वािजब करार Ǒदया है, और इसी अवस्थ मɅ उस के �लए बिख्श, नरक से मुǒƠ, और रोज़े व तरावीह कȧ स्वीकृ� कȧ आशा कȧ जा सकती है। कु छ बातɅ ऐसी हɇ िजनसे कु छ लोग अन�भग रहते हɇ : 1 ु ु ु ु ु � � � � द ् ् सह ह बखार , Ǒकताबल अ ब (१९०३), सनन त मज़र Ǒकताबससौ (७ ०७ ), सनन अबू दाऊद Ǒकताबुस्सौ (२३६२), सुनन इब्न माजा Ǒकताबुिस्सया (१६८९), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ ५ ०५ ).

17 उन्ह� मɅ से एक यह है Ǒक मुसलमान के ऊपर अ�नवायर हɇ Ǒक वह ईमान के साथ सवाब कȧ आशा रखते हुए रोज़ा रखे, Ǒदखावे के �लए, नाम कमाने के �लए, लोगɉ कȧ देखा-देखी या अपने पǐरवार या अपने शहर के लोगɉ का अनुकरण करते हुए रोज़ा न रखे। बिल् उस के ऊपर अ�नवायर यह है Ǒक उसे रोज़ा रखने पर उभारने वाली चीज़ उसका यह ईमान हो Ǒक अल्ला ने इसे उसके ऊपर अ�नवायर Ǒकया है, और इस बारे मɅ वह अपने रब से अज व सवाब कȧ आशा रखे। इसी प्रक रमज़ान के Ǒक़याम (अथार् तरावीह) के �लए भी ज़रूर है Ǒक मुसलमान उसे ईमान के साथ अज व सवाब कȧ आशा रखते हुए करे, Ǒकसी अन् कारण से न करे। इसी �लये आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल ने फरमाया : ''िजस ने ईमान के साथ पुण् कȧ आशा रखते हुए रमज़ान का रोज़ा रखा तो उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदए जाएंगे। और िजस ने ईमान कȧ हालत मɅ पुण् कȧ आशा रखते

18 हुए रमज़ान का Ǒक़याम Ǒकया (तरावीह कȧ नमाज़ पढ़�) तो उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदए जायɅगे। और िजस ने ईमान रखते हुए पुण् कȧ आशा मɅ क़द वाली रात मɅ Ǒक़याम Ǒकया (इबादत मɅ ǒबताया) उसके ǒपछले (छोटे-छोटे) गुनाह ¢मा कर Ǒदए जाएंगे।''७F1 उन्ह� बातɉ मɅ से िजन का हुक् कु छ लोगɉ पर गुƯ रह जाता है यह है Ǒक कभी कभार रोज़ेदार घाव, या नकसीर से पीǑड़त हो जाता है, या उसकȧ इच्छ व �नयंतण के ǒबना उसके गले मɅ पानी या पेट्र चला जाता है, तो इन सभी चीज़ɉ से रोज़ा ख़राब नह�ं होता है, परन्त जो व्यƠ जानबूझ कर उल्ट कर दे 1 सह�ह बुखार�, Ǒकताब सलातुत-तरावीह (१९१०), सह�ह मुिस्ल Ǒकताब सलातुल ु ु ु ु � � � ् ् ु मसाǑफर न व क़सरह (७ ६०), सनन त मज़र, Ǒकताबससौ (६८३), सनन नसाई Ǒकताबुिस्सया (२२०३), सुनन अबू दाऊद, Ǒकताबुस्सला (१३७ २), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ २४१), सुनन दारमी Ǒकताबुस्सौ (१७ ७ ६).

19 तो उस का रोज़ा खराब हो जायेगा, क्यǑ� नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है Ǒक: ‘‘िजस पर क़य (उल्ट) ग़ा�लब आगई उस पर कोई क़ज़ा नह�ं और िजसने जानबूझ कर क़य Ǒकया वह (रोज़े कȧ) क़ज़ा करे।''८F1 उन्ह� बातɉ मɅ से एक यह है Ǒक रोज़ेदार को कभी जनाबत के स्ना को फज के �नकलने तक ǒवलंब करना पड़ता है, और कु छ औरतɉ को हैज़ (माहवार�) अथवा �नफास (प्र) के स्ना को फज �नकलने तक ǒवलंब करना पड़ता है जब वह फज से पहले पाकȧ को देखती है, तो ऐसी अवस्थ मɅ उस पर रोज़ा रखना ज़रुर है, और फज उदय होने के बाद तक स्ना को ǒवलंब करने मɅ कोई रुकाव नह�ं है, परन्त उसके �लए उसे 1 ु ु ु ु ु � � द द ् ् ् सनन त मज़र, Ǒकताबससौ (७ २०), सनन अबू ाऊ , Ǒकताबससौ (२३८०), सनन इब्न माजा Ǒकताबुिस्सया (१६७ ६) मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ ४९८), सुनन दारमी Ǒकताबुस्सौ (१७ २९).

20 सूयर के उदय होने तक ǒवलंब करने कȧ अनुम�त नह�ं है, बिल् उस के ऊपर ज़रूर है Ǒक वह सूयर के �नकलने से पहले ह� स्ना करे और फज कȧ नमाज़ पढ़े। इसी प्रक जनाबत वाले के �लए सूयर के �नकलने के बाद तक स्ना को ǒवलंब करना जायज़ नह�ं है, बिल् उसके ऊपर अ�नवायर है Ǒक वह स्ना करे और सूयर के �नकलने से पहले ह� फज कȧ नमाज़ पढ़े, जबǑक पुरू के ऊपर ज़रुर है Ǒक वह इस मɅ जल्द करे ताǑक वह फज कȧ नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ सके। तथा िजन चीज़ɉ से रोज़ा नह�ं खराब होता है : खून जाँच करवाना, ऐसा इन्जेक् लगवाना जो खूराक का काम नह�ं करता है, परन्त अगर हो सके तो उसे रात तक ǒवलंब करना बेहतर और अ�धक सावधानी का पात है। क्यǑ� नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है : ''जो चीज़

21 तुम्ह शंका (सन्दे) मɅ डालने वाली हो उसे छोड़ कर उस चीज़ को अपना लो जो तुम्ह शंका मɅ डालने वाली न हो।''९F1 और आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है : ''जो व्यƠ शुब्हा (सन्देह) से बच गया उसने अपने द�न और इज़्ज़ व आबर को बचा �लया।'' १०F2 उन्ह� बातɉ मɅ से िजन का हुक् कु छ लोगɉ पर गुƯ रह जाता है: नमाज़ मɅ इत�मनान व िस्थरत का न पाया जाना है, चाहे वह नमाज़ फ़जर हो या नफल हो। और अल्ला के रसूल 1 ु ु ु ु � � � ् ् सनन त मज़र, सफतल Ǒक़यामह वǐरराक़ वल-वरअ (२५ १८) सनन नसाई Ǒकताबल ु ु ु ु ं द द द श अ ǐरबा (५ ७ ११), मसन अहम ǒबन हबल (१ध२्००) सनन ारमी Ǒकताबल बयूअ (२५ ३२). 2 सह�ह बुखार�, Ǒकताबुल ईमान (५ २), सह�ह मुिस्ल Ǒकताबुल मुसाक़ात (१५ ९९), सुनन ु ु ु ु ु ु � � ् त मज़र Ǒकताबल बयूअ (१२०१५ ), सनन नसाई Ǒकताबल बयूअ (४४५ ३), सनन अबू दाऊद Ǒकताबुल बुयूअ (३३२९), सुनन इब्न माजा Ǒकताबुल Ǒफतन (३९८४), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (४/ २७ ०) सुनन दारमी Ǒकताबुल बुयूअ (२५ ३१).

22 सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल कȧ सह�ह हद�सɅ यह इं�गत करती हɇ Ǒक इत�मनान व िस्थरत नमाज़ के स्तंभ मɅ से एक स्तं है िजस के ǒबना नमाज़ सह�ह नह�ं होती है, और वह नमाज़ के अंदर िस्थरत और ǒवनम्र अपनाना तथा जल् बाज़ी से काम न लेना है यहाँ तक Ǒक हर जोड़ अपने स्था पर लौट आए। बहुत सारे लोग रमज़ान मɅ तरावीह कȧ नमाज़ इस तरह पढ़ते हɇ Ǒक वे उसे न तो समझते हɇ और न ह� उस मɅ इत�मनान व िस्थरत से काम लेते हɇ, बिल् उस मɅ कु छ चɉच मारते हɇ। जबǑक इस तर� क़े पर यह नमाज़ बेकार (व्यथ) है, और ऐसी नमाज़ पढ़ने वाला गुनाहगार है उसे सवाब नह�ं �मलता है। तथा उन्ह� बातɉ मɅ से िजनका का हुक् कु छ लोगɉ पर गुƯ रह जाता है: कु छ लोगɉ का यह समझना है Ǒक बीस रकअत से कम तरावीह का पढ़ना जायज़ नह�ं है, इसी तरह कु छ लोगɉ का यह समझना है Ǒक ग्यार रकअत या तेरह रकअत से अ�धक तरावीह पढ़ना जायज़ नह�ं है, हालांǑक ये सब भ् हɇ

23 जो अपनी जगह मɅ नह�ं हɇ बिल् वह एक गल्त है जो दलीलɉ के ि़खलाफ है। अल्ला के पैगंबर सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से प्रमाि सह�ह हद�सɅ इस बात को इं�गत करती हɇ Ǒक रात कȧ नमाज़ मɅ ǒवस्ता है, इसकȧ कोई �नधार्�र सीमा नह�ं है िजसका ǒवरोध करना जायज़ नह�ं, बिल् आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से साǒबत है Ǒक आप रात कȧ नमाज़ ग्यार रकअत पढ़ते थे और कभी कभार आप ने तेरह रकअत पढ़� और कभी कभी रमज़ान के मह�ने मɅ और अन् मह�नɉ मɅ इस से कम नमाज़ पढ़�, और जब आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल से रात कȧ नमाज़ के बारे मɅ पूछा गया तो फरमाया: ‘‘दो-दो रकअत है, तो जब तुम मɅ से Ǒकसी को सुबह होने का भय हो

24 तो एक रकअत नमाज पढ़़ ले, यह उसकȧ पढ़� हुई नमाज़ को ǒवत बना देगी।'' 11F1 तथा आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल ने रमज़ान और अन् मह�नɉ मɅ कोई ǒव� शसंख्य �नधार्�र नह�ं Ǒकया है। इसी�लए उमर रिज़यल्लाह अन्ह के समयकाल मɅ सहाबा रिज़यल्लहु अन्हु ने कभी तेईस (२३) रकअत तरावीह पढ़� और कभी ग्यार रकअत तरावीह पढ़� है। ये सब उमर रिज़यल्लाह अन्ह से और आपके समयकाल मɅ सहाबा रिज़यल्लाह अन्हु से प्रमाि है। 1 सह�ह बुखार� Ǒकताबुस्सला (४६०), सह�ह मुिस्ल Ǒकताब सलातुल मुसाǑफर�न व ु ु ु ु ु � � ् ् क़सरहा (७ ४९), सनन त मज़र Ǒकताबसलसा (४६१), सनन नसाई Ǒकताब Ǒक़यामललै् (१६९१), सुनन अबू दाऊद Ǒकताबुस्सला (१३२६), सुनन इब्न माजा Ǒकताब इक़समतुस्सला (११७ ५ ), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (२/ १०२), मुवƣा इमाम मा�लक Ǒकताबुिन्नद �लस्सला (२६९).

25 तथा कु छ सलफ सा�लह�न रǑहमहुमुल्ला रमज़ान मɅ छƣीस रकअत तरावीह और तीन रकअत ǒवत पढ़ते थे, और कु छ तो इƠालीस रकअत पढ़ते थे। इस बात को शैखुल इस्ला इब्न तै�मयह रǑहमहुल्ला और अन् ǒवद्धा ने उनसे वणर् Ǒकया है। तथा आप रǑहमहुल्ला ने वणर् Ǒकया है Ǒक इस संबंध मɅ मामले के अंदर ǒवस्ता है और यह भी बयान Ǒकया है Ǒक जो Ǒक़राअत और रुकू व सज्द लम्ब करता है उस के �लए बेहतर है Ǒक रकअतɉ कȧ संख्य कम कर दे, और जो Ǒक़राअत और रुकू व सज्द हल्क करता है, वह रकअतɉ कȧ संख्य बढ़ा दे। यह आप रǑहमहुल्ला कȧ बात का अथर है। और जो व्यƠ आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल कȧ सुन्न मɅ मनन�चन्त करेगा उसे पता चल जायेगा Ǒक इन सब मɅ सबसे बेहतर रमज़ान और अन् मह�नɉ मɅ ग्यार रकअत या तेरह रकअत तरावीह कȧ नमाज़ पढ़ना है, क्यǑ� अक्स हालतɉ मɅ यह� आप नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल के

26 अमल के अनुसार है, और इस�लए Ǒक यह� नमािज़यɉ के �लये अ�धक आसान है और खुशूअ व इत�मनान के अ�धक �नकट है, और िजस ने इसपर वृǒद कȧ तो कोई हरज और कोई घृणा कȧ बात नह�ं है जैसा Ǒक यह बात गुजर चुकȧ है। और जो व्यƠ इमाम के साथ रमज़ान का Ǒक़याम करता (तरावीह पढ़ता) है उस के �लये बेहतर यह है Ǒक वह इमाम के साथ ह� पलटे, क्यǑ� नबी सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है Ǒक: ‘‘जब आदमी इमाम के साथ तरावीह पढ़ता है यहाँ तक Ǒक वह फाǐरग़ हो जाता है तो अल्ला उसके �लये एक रात का Ǒक़याम �लखता है।'' 12F1 1 ु ु ु ु ु � � ् ् (सनन त मज़र Ǒकताबससौ (८०६), सनन नसाई Ǒकताबस सहव (१३६४), सनन अबू दाऊद Ǒकताबुस्सला (१३७ ५ ), सुनन इब्न माजा Ǒकताबुल इक़ामतुस्सला (१३२७ ), ु ु ु ं द द द ् मसन अहम ǒबन हबल (५ध१्६०) सनन ारमी Ǒकताबससौ (१७ ७ ७ ).

27 सभी मुसलमानɉ के �लए इस सम्मा�न मह�ने मɅ अनेक प्रक कȧ उपासनाओं मɅ संघषर करना धमर्संग है - जैसे नफ् नमाज़, समझबूझ और मनन�चंतन के साथ कु रआन कȧ �तलावत, अ�धक से अ�धक सुबहानल्ला, ला-इलाहा इल्लल्ल, अल्हम्दु�लल्, अल्लाह अक्ब पढ़ना, इिस्तग़फ़ा और शरई दुआयɅ करना, भलाई का आदेश देना और बुराई से रोकना, और अल्ला तआला कȧ ओर लोगɉ को बुलाना, �नधर्न और गर�बɉ का ध्या रखना, माता-ǒपता के साथ अच्छ व्यवहा करना, ǐरश्तेदार को जोड़ना, पड़ोसी का सम्मा करना, बीमार कȧ तीमारदार� करना और इसके अलावा अन् प्रक के भलाई के काम। क्यǑ� ǒपछली हद�स मɅ आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का फरमान है : ''अल्ला इस मह�ने मɅ तुम्हार (नेकȧ मɅ) एक दूसरे से आगे बढ़ने कȧ चे�ा को देखता है तो तुम्हार ऊपर अपने फǐरश्त के सामने गवर करता है। अतः तुम अपनी ओर से अल्ला को नेकȧ व भलाई Ǒदखलाओ, क्यǑ� वह

28 व्यƠ अभागा (बदनसीब) है जो इस मह�ने मɅ अल्ला कȧ रहमत (दया) से वं�चत रह जाए।'' और चूँǑक आप सल्लल्ला अलैǑह व सल्ल का सह� हद�स मɅ फरमान है Ǒक ''रमज़ान का उम् एक हज् के बराबर है'' - या आप ने फरमाया – ''मेरे साथ हज् करने के बराबर है।''१३F1 और इस मुबारक मह�ने मɅ अनेक प्रक कȧ नेǑकयɉ मɅ पहल करने और एक दूसरे से आगे बढ़ने कȧ वैद्ध को दशार्न वाली हद�सɅ और आसार बहुत हɇ। अल्ला से दुआ है Ǒक वह हमɅ और सभी मुसलमानɉ को उस चीज़ कȧ तौफȧक़ दे िजस मɅ उस कȧ प्रसन् हो, और हमारे रोज़ɉ और Ǒक़याम (तरावीह) को क़बूल करे, हमार� िस्थ�तय को 1 ु ु ु ु � � द द ् ् ् (सनन त मज़र Ǒकताबल हज (९३९), सनन अबू ाऊ Ǒकताबसलसा (१९८८), सुनन इब्न माजा Ǒकताबुल मना�सक (१३२७ ), मुसनद अहमद ǒबन हंबल (६/ ३७ ५ ) सुनन दारमी Ǒकताबुल मना�सक (१८६०).

29 सुधार दे, और हम सबको पथभ् करने वाले ǑफƤɉ से सुरि¢त रखे। तथा हम अल्लह से दुआ करते हɇ Ǒक वह मुिस्ल नेताओं का सुधार करे, और उन्ह हक़ के ऊपर एकजुट कर दे, �नःसंदेह वह इसका स्वाम और इसपर शǒƠमान है।

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